
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ दीपा पाठक ने बताया कि वर्षा ऋतु के प्रारंभ होते ही मच्छर एवं अन्य वाहकों से जनित बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए, ‘राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ के अंतर्गत मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के नियंत्रण एवं प्रभावी प्रबंधन हेतु एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन ipps training सेंटर में किया गया।
इस वर्ष वाहक जनित बीमारियों के पूर्ण नियंत्रण और शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को लेकर आयोजित इस संयुक्त प्रशिक्षण में मंदसौर और नीमच जिले के जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ता को प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य अमले को विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न बीमारियों की बारीकियों से अवगत कराया गया।
मास्टर ट्रेनर के रूप में उज्जैन जिला मलेरिया अधिकारी श्री दिनेश्वर ससौदिया ने डेंगू एवं जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण, लक्षण और उसके रोकथाम के वैज्ञानिक उपायों पर अपना विस्तृत व्याख्यान दिया।
नीमच जिले के जिला मलेरिया अधिकारी श्री अल्पेश वारिया द्वारा मलेरिया एवं फाइलेरिया (हाथीपांव) के प्रभावी प्रबंधन, मरीजों की पहचान और उपचार प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से समझाया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ दीपा पाठक ने सभी प्रकार की वाहक जनित बीमारियों की समग्र जानकारी देते हुए उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों और क्षेत्र में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला गया।
क्षेत्र में बीमारियों के सर्वे और रोकथाम की मुख्य जिम्मेदारी जमीनी कार्यकर्ताओं की होती है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, इस प्रशिक्षण बैठक में मंदसौर एवं नीमच जिले के सभी सुपरवाइजर, एम.पी.डब्ल्यू. (MPW), ए.एन.एम. (ANM) और मलेरिया इंस्पेक्टर विशेष रूप से सम्मिलित रहे। सभी प्रतिभागियों को वर्षा काल के दौरान जलभराव रोकने, लार्वा नष्ट करने और त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

