
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में धर्मराजेश्वर का मंदिर स्थित है । इस मंदिर का निर्माण पत्थर को काटकर किया गया है। यह मंदिर मंदसौर जिला मुख्यालय से लगभग 106 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पाचवी व छठवी शताब्दी में निर्मित प्राचीन मंदिर हैं। पहले यह विष्णु भगवान जी को समर्पित मंदिर था बाद मे ईसे शिवमंदिर के रूप मे तैयार किया गया | इस मंदिर के गर्भग्रह में एक भगवान विष्णु की प्रतिमा एवं शिवलिंग भी है। महाशिवरात्रि धर्मराजेश्वर में मनाया जाने वाला प्राथमिक उत्सव है।

हिन्दू शैलोत्कीर्ण मंदिर, धर्मराजेश्वर/धर्मनाथ मंदिर
धमनार स्थित यह पूर्वाभिमुख मंदिर पूर्ण रूप से एकाश्मक शैलोत्कीर्ण मंदिर है। यह मंदिर एक समतल चट्टान में 35×22 वर्ग मी. की खाई खोदकर बनाया गया है। नागर शैली का यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है तथा परिसर में स्थित अन्य 7 छोटे मंदिरों में विष्णु के विभिन्न रूपों का प्रदर्शन किया गया है। मुख्य मंदिर में मुखमण्डप, महामण्डप, अंतराल तथा गर्भगृह का प्रावधान है। वितान ज्यामितिय तथा पुष्प अलंकरण से सुसज्जित है। यह मंदिर निरंधार है अर्थात इसमें प्रदक्षिणापथ नहीं है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर गंगा तथा यमुना का अलंकरण है। गर्भगृह के अंदर वर्तमान में शिवलिंग स्थापित है। गर्भगृह के अंदर के एक आले में चतुर्भुजी विष्णु कि प्रतिमा स्थापित है जिसमें विष्णु के दशावतारों का भी अंकन किया गया है।
मुख्य मंदिर के चारों ओर सात अन्य छोटे मंदिर हैं। यह मंदिर ऐलोरा के कैलाश नाथ मंदिर से काफी समानता रखता है। दोनों ही मंदिर विशाल चट्टान को खोदकर बनाए गये हैं। मंदिर की प्रतिमाएँ भी एक दूसरे से काफी समानता रखती है। मंदिर के मण्डप के दाँयी ओर स्थित एक प्रतिमा के निचले भाग से मिले अभिलेख तथा उसकी लिपि के आधार पर इस मंदिर की तिथि 8वीं-9वीं शताब्दी ईस्वी निर्धारित की जा सकती है।

धमनार की शैलगुहायें
धमनार के सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथा मनोरंजक स्मारक यहां की बोद्ध तथा ब्राह्मण औतायें और मन्दिर हैं। ये दहिणी नारी की बुरटी नया मुरमीकी शिला में उकेरी गई है। ओली तथा विन्यास की प्राधान्य विशेषताओं के आधार पर ये बौद्ध गुराये आटनों तथा नानीं शताब्दी के निरूपित की जा सकती है। ब्राह्मण अन्दर भी लगभग इन्हीं के सगकाली हैं। इनमें चौदह गुहाये महत्वपूर्ण हैं।

भीम बाजार
भीम बाजार विशालतम चैत्यालय है। यह एक अर्द्ध मण्डप अथवा बरामदा तथा दो अन्य कक्षों से बना है, आयताकार प्राङ्गण के मध्य मे एक चैत्य है तथा तीन ओर लघुगर्भ शालाये हैं। केन्द्रीय गर्भ में एक लघु चैत्यालय है। यहाँ बुद्ध की आसीम प्रतिमायें भी है।
बड़ी-कचहरी
बड़ी कचहरी एक विशाल चेत्य विहार है, सामने का स्तम्भों वाला भाग शिला- वेदिका से आबद्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय गुहाओं की दिवारों के तल तथा छतें कभी लेप से आच्छादित थी तथा चित्रयुक्त थी, किन्तु अब इनके अवशेष उपलब्ध नहीं हैं।
यह स्मारक प्राचीन संस्मारक, पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 (प्राचीन संस्मारक एवं पुरातात्विक स्थल व अवशेष (संशोधन विधिमान्यकरण अमिनियम 2010 द्वारा संशोधित) के अन्तर्गत राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया है।

हवाई मार्ग
मंदसौर जिले मे कोई भी एयरपोर्ट नही हैं, नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर और इंदौर हैं |
ट्रेन द्वारा
इस मंदिर तक पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन शामगढ़ रेलवे स्टेशन है, जो लगभग मंदिर से 22 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर चंदवासा कस्बे से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है और सड़क मार्ग से जुड़ा है।







